चाँद की चांदनी में शरद पूर्णिमा को महा लक्ष्मी को करे प्रसन्ना

यूँ तो हर मास पूर्णिमा का चाँद उगता है लेकिन sharad purnima का चाँद कुछ विशेष होता है l एसा कहा जाता है कीइस दिन चाँद प्रथ्वी के सबसे निकट होता है इसलिए इस पूर्णिमाकी रात में विशेष उजास होता है lदूसरा वर्षा ऋतू के कारण धरती आकाश एक दम स्वच्छ हो जाते है चारो और वर्षा होती है और प्रकृति जल से नहाकर पूर्णिमा की अगवानी करने के लिए तैयार हो जाती है चाँद भी अपनी सोलह कलाओ के साथ चांदनी धरतीपर बिखेरता है lइस अनुपम उजास भरी चांदनी का म्रदुल स्पर्श पाकर सरोवर में कुमुद खिल उठते है यही वजह ही की चांदनी को ‘कौमुदी भी कहते है l

वाकई में हम यहाँ कह सकते है की हमारा भारत देश उत्सव प्रधान देश है यह पर ऋतुओ के मध्यम से प्रकृति भी उत्सव रचती है l

यह समय है महा लक्ष्मी को प्रसन्ना करने का

आश्विन मास केशुक्ल पक्ष की शरद पूर्णिमा  को कोजागर चाँद भी कहते है और इस तिथि को ‘कोजागर पूर्णिमा’भी कहते हैइस ददिन किये जाने वाले व्रत को कोजागर व्रत भी कहते है इस रात्रि में विशेष रूप से माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है l इस दिन जागरण का विशेष महत्त्व बताया जाता है उनसे सोभाग्य सम्पन्नता की याचना की जाती है l सचमुच शरद पूर्णिमा की चांदनी अपनी दिव्यता में तन – मन हदय पर ऐसे जादू सी छ जाती है की हदय उसके आनंद में डूब कर नृत्य करने लगता है l ज्योतिशो का मतहै की जो इस रात को जागकर लक्ष्मी उपासना करते है उन्हें माता धन धान्य से सम्पन्न कर देती है l

आनंद का रास

शरद पूर्णिमा की महारात्रि में भगवन कृष्णा ने ब्रज गोपियों के साथमहारास किया था lकहा जाता हैकी पूर्णिमा की वह रात्रि छः महीनेकी हो गयी थी lउस समय समस्त लोग और प्रकृति उस आनंद में डूब गये थे l

आरोग्य का वरदान

चन्द्रमा ओ अमृत घट है maa-laxmi-sharad-purnima के अवसर पर यह अपनी किरणों के रूप में अमृत की वर्षा करता है l इस अमृत को सहेजने के लिए लोग दूध और खीर रात की चांदनी में रखते है और उस अमृतमय प्रसाद को ग्रहण कर धन्यता का अनुभव करते है l वैध भी दम के रोगीयो के लिए चांदनीरात में दावा तैयार करते है lचन्द्रमा को औषधियों का पोषक माना गया