गर्भावस्था के दौरान केसे करे करवा चौथ का व्रत

ऎसा कोई शोध नहीं है जो यह बता सके कि गर्भावस्था के दौरान व्रत रखना बच्चे के लिए सुरक्षित है या नहीं, लेकिन करवा चौथ में तो एक बूंद पानी भी नहीं पीना होता। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। गर्भावस्था pregnency में यह कमी आपको काफी असहज कर सकती है। इसके अलावा बच्चे को हर रोज पोषण चाहिए होता है, ऎसे में आपके व्रत रहने से उसे भी परेशानी हो सकती है।

हम जानते है की महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह व्रत परेशानी पैदा कर सकता है। अगर आप गर्भवती हैं तो कुछ आसान उपाय आजमा कर आप व्रत भी पूरा कर सकती हैं और गर्भस्थ शिशु भी स्वस्थ्य रहेगा।व्रत में पानी न पीने के कारण डीहाइड्रेशन होने की आशंका रहती है। पूरे दिन खाना न खाने से हाइपोग्लाइसिमिक शुगर का स्तर गिरने का खतरा भी रहता है। इससे गर्भस्थ शिशु को पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं व्रत ना रखें तो अच्छा है। फिर भी अगर वह व्रत रखना चाहती हैं तो ध्यान रखने की जरूरत है।

इस तरह रख सकती हैं व्रत Pregnency-karvachouth

  •  व्रत को शुरू करने से पहले व्रत में सरगी की मन्यता है जो की सूर्योदय के पहले ली जाती है ध्यान रहे की गर्बवस्था के दौरानव्रत  शुरू होने से पहले ऐसा भोजन कर लें जो ज्यादा समय तक पेट में रहे, जो जल्दी पचे न।
  • आपभले ही कुछ ना खाएं, लेकिन जूस सहित तरल पदार्थों का सेवन करते रहें, जिससे पानी की कमी न हो।
  • घर में खुशी का माहौल रखें और काम करने के बजाय अधिक आराम करें।अपनी सेहत का ध्यान रखे और काम के दौरान घर वालो या पति की मदद लेl
  • व्रत पूरा होने के बाद एक बाद लम्बे समय तक भूखे रहने के बाद एक साथ ज्यादा न खाएं, इससे अपच और गैस के कारण पेट दर्द हो सकता है। तरल पदार्थ लें इसके बाद थोड़ा—थोड़ा भोजन करें।

 

अपनाध्यान किसी काम में लगा कर रखे

अपना ध्यान किसी और काम में बंटाने की कोशिश करें। जितना आप व्रत, भूख के बारे में सोचेंगी, आपको भूख उतनी ही ज्यादा लगेगी। इसलिए आप हल्का-फुल्का काम करें। दोपहर में सो जाएं और उठ कर शाम की पूजा की तैयारी शुरू कर दें। आप चाहें तो दिन में कोई फिल्म भी देख सकती हैं। या कोई किताब या कोई धार्मिक पुस्तक पढ़ सकती हैl

 

ये लक्षण हैं तो डॉक्टर से करें संपर्क  

 

  • बार बार उलटी होना l
  • थकन और बेचेनी होना l
  • गर्भस्त शिशु में अधिक हलचल होना l
  • पेट में दर्द होना l