चैत्र नवरात्र में माँ आदिशक्ति का पूजन

हिन्दू धर्म में माता दुर्गा को आदिशक्ति कहा जाता है। शक्तिदायिनी मां दुर्गा की आराधना के लिए साल के दो माह बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। यह दो समय होते हैं चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र।

                    सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। 
                      शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

 

नवरात्रि का अर्थ होता है,नौ रातें। हिन्दू धर्मानुसार यह पर्व वर्ष में दो बार आता है। एक शरद माह की नवरात्रि और दूसरी चैत्र माह की। इस पर्व के दौरान तीन प्रमुख हिंदू देवियों- पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरूप-

  • श्री शैलपुत्री
  • श्री ब्रह्मचारिणी,
  • श्री चंद्रघंटा,
  • श्री कुष्मांडा
  • श्री स्कंदमाता,
  • श्री कात्यायनी
  • श्री कालरात्रि
  • श्री महागौरी
  • श्री सिद्धिदात्री

माता के नव स्वरूपों  का पूजन विधि विधान से किया जाता है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की। तब से असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है जिन्होंने सृष्टि के आरंभ से लेकर अभी तक इस पृथ्वी लोक पर विभिन्न लीलाएं की थीं।

           दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
             स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
              दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
               सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥

 

मान्यता है कि आश्विन मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात में श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष भगवती महाशक्ति प्रकट हो गई। देवी उस समय सिंह पर बैठी हुई थीं। भगवती ने प्रसन्न-मुद्रा में कहा- ‘श्रीराम! मैं आपके व्रत से संतुष्ट हूं।

जो आपके मन में है, वह मुझसे मांग लें। सभी जानते हैं कि रावण-वध के लिए ही आपने पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में अवतार लिया है। आप भगवान विष्णु के अंश से प्रकट हुए हैं और लक्ष्मण शेषनाग के अवतार हैं। सभी वानर देवताओं के ही अंश हैं, जो युद्ध में आपके सहायक होंगे। इन सबमें मेरी शक्ति निहित है। आप अवश्य रावण का वध कर सकेंगे। अवतार का प्रयोजन पूर्ण हो जाने के बाद आप अपने परमधाम चले जाएंगे। इस प्रकार श्रीराम के शारदीय नवरात्र-व्रत से प्रसन्न भगवती उन्हे मनोवांछित वर देकर अंतर्धान हो गई।

नवरात्र चैत्र माह में मनाया जाता है। जबकि शारदीय नवरात्र आश्विन माह में मनाया जाता है।

माँ दुर्गा करुनामयी है वे ज्ञान की सागर है अर्थात नवरात्र के दिनों में यदि हम सच्चे मन से माँ दुर्गा की भक्ति करते है माँ की सेवा करते है दान , हवन , पूजन ,सेवा दर्शन अदि कार्य करते है तो माँ दुर्गा व्यक्ति पर सदा अपनी कृपा बनाये रखती है . नवरात्री के दिनों में सभी को लोभ मोह जिज्ञासा त्याग कर माँ की पूजा अर्चना करनी चहिये . माँ दुर्गा  स्मरण करने पर सब प्राणियों का भय हर लेती हैं और स्वस्थ पुरषों द्वारा चिन्तन करने पर उन्हें परम कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करती हैं। दु:ख, दरिद्रता और भय हरनेवाली देवि! आपके सिवा दूसरी कौन है, जिसका चित्त सबका उपकार करने के लिये सदा ही दया‌र्द्र रहता हो।

2 thoughts on “चैत्र नवरात्र में माँ आदिशक्ति का पूजन

  • November 11, 2016 at 6:49 am
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    jai ho ma durga ki

  • November 26, 2016 at 8:20 am
    Permalink

    बहुत अच्छा

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