हृदय रोग: लक्षण, कारण और उपचार

सामान्य रूप से सीने में धड़क रहा दिल जीवन को सुचारू रूप से चलाने की निशानी और ग्यारंटी होता है l दिल एक निश्चित लय और ताल पर धड़कता है l इसकी गति और ताल में ज़रासी गड़बड़ी भी शारीर के समूचे स्वास्थ्य को संकट में खड़ा कर सकती है l

क्या आपको कभी हाल ही में चक्कर आया है ,और सिने में दर्द भी महसूस हुआ है ? इसी के साथ यदि आपको सांस लेने में भी दिक्कत आ रही है और हमेशा से कही ज्यादा थकावट महसूस हो रही है तो आपको जल्द ही किसी हदय रोग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए l हो सकता है की आपके दिल के वाल्व ख़राब हो रहे हो आप गंभीर संकट में पड़ने जा रहे है l

क्या होते है दिल के वोल्व  

दिल की धडकनों की गति नियमित और एक सामान चलने के लिए दिल के वाल्व जिम्मेदार होते है यदपि इसका आकार ज़रूर छोटा होता है लेकिन इनकी उपयोगिता इन्हें बहुत ही बड़ा बना देती हैl दिल में चार वोल्व होते है जो की काम करते रह्ते है ये दिल के  एक कक्ष से दुसरे कक्ष में रक्त  को आगे बह जाने के लिए खुलते और रक्त को वापस लोटकर ना जाने देने के लिए बंद हो जाते है lइन चारो वोल्व के सुचारू रूप से काम करते रहने पर ही शरीर पूरी तरह स्वस्थ रहता है इनके ख़राब होने पर सर्गेरी ही बेहतर विकल्प है l

लक्षणों को नज़रंदाज़ करना गलत

डॉक्टर कहते है की हार्ट अटैक के अधिकतर मामलो में लक्षणो को नज़रंदाज़ करना ही जानलेवा होता है लोग इन्हें मांसपेशियों का दर्द ,अपच या अन्य सामान्य परेशानी समझ लेते है l

टाले नहीं बल्कि तुरंत चिकित्सक को दिखाए

यहाँ ज़रूर जान ले की हार्ट अटैक के क्या कारण होते है और इसमें किन बातो का ध्यान रखना चाहिए :-

  • हार्ट अटैक अचानक नहीं होता बल्कि इसके लक्षण लम्बे समय से संकेत दे रहे होते है
  • यदि आपको नोशिया ,सिने में दर्द ,गर्दन ,कालरबोन ,जबड़े या बांहों में दर्द लगातार हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
  • परिवार में हदय सम्बन्धी बीमारी का इतिहास ,उच्च रक्तचाप का इलाज जारी हो ,डायीबिटीस हो या अन्य जीवनशेली सम्बन्धी कोई समस्या हो तो नियमित रूप से डॉक्टर से मार्गदर्शन लेते रहे
  • यदि आपको देनिक कार्य करने में जल्दी – जल्दी थकन होती है बार बार सांस फूलती है तो भी अपने डॉक्टर को अवश्य बताये
  • हाई ब्लड प्रेशर ,डायीबिटिस,थायराइड की दवाए नियमित रूप से ले और कभी भी बिना पूछे बंद ना करे
  • पोषक आहार और नियमित व्यायाम पर पूरा ध्यान देl
  • तनाव व दबाव वाली स्थिती से बचने की कोशिश करे

क्या है कारण

दिल की धडकनों में गति में गड़बड़ी किसी एक स्वस्थ्य ह्रदय में भी हो सकती है जब यहाँ निम्न समस्या से ग्रस्त हो :-

  • रक्त में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन दिल की धडकनों को असामान्य गति गति प्रदान कर सकता है l
  • दिल की मांसपेशियों में हुआ कोई बदलावl
  • दिल के दौरे के कारण हदय की मांसपेशियों में आई क्षति
  • दिल की सरजॆरी के बाद रिकवरी के दौरान दिल की धडकनों की गति असामान्य हो सकती है

क्या है लक्षण

  • डॉक्टर शारीरिक जांचो से जान सकते है की दिल की धडकनों की गति असामान्य व्यवहार कर रही है lस्थेटेस्कोप और नदी परिक्षना से सुनिश्चित करने के बाद इसिजी से भी इसका पता लगाया जा सकता है l
  • दिल की धडकनों की ताल चूकना या तेज़ी से धड़कना
  • सीने को अन्दर से कोई ठोक रहा है ऐसा महसूस करना l
  • चक्कर आना तथा अल्प समय के लिए बेहोश होना l
  • सांस उखड़ना l
  • सीने में दर्द और खिचाव महसूस करना l
  • हमेशा थकन महसूस करना l

क्या है उपचार

दिल की अनियमित हो चुकी गति का इलाज बीमारी की गंभीरता पर निर्भर है lकई मामलो में मरीज को दिनचर्या में परिवर्तन करके ही फायदा हो जाता है तो कुछ मरीजो को पेसमेकर लेने की सलाह दी जाती है पेसमेकर को सबसे सुरक्षित इलाज मन जाता है l

हदय की सालाना जांचे

शरीर में हमेशा कुछ ना कुछ क्षतिग्रस्त होता रहता है उसे ठीक करने का काम भी प्राकृतिक तौरपर निरंतर चलता रहता है दिल भी निरंतर धडकता रहता है इसलिए इसकी काम करने की क्षमता का भी आंकलन होना चाहिए दिल के स्वास्थ्य के अधर पर वार्षिक जांचो को चिकित्सक तय करता है l

क्या है जांचे

सीने का एक्स –रे

स्ट्रेस टेस्ट जिसके अंतर्गत यहाँ सब कुछ जांचा जाता है की आपका दिल किस हद तक परिश्रम व तनाव झेल सकता है

एकोकार्दियोग्राम

कार्डियक कैथेरैज़ेशन जिसके अंतर्गत हदय के अन्दर एक कैथेटर घुमाकर पता लगाया जाता है l

हदय के रिदम की जांच

सिटी हार्ट स्कैन जिससे दिल की अंदरूनीस्तिथि का पता लगाया जाता है l

एमआरआई      

इसमें एक सुई की सहायता से हदय के आस पास के द्रव्य निकल कर जांच की जाती है

दिल की बीमारी एकदम से सामने नहीं आती इसके बहुत से लक्षण पहले से ही सामने आजाते हैं कुछ ऐसे रिस्क भी होते है जिन्हें 40 के बाद करायी गयी सालाना जांचो में पकड़ा गया है सालाना जांचो में पुरे शारीर का प्रोफाइल मिल जाता है इससे शुरूआती गड़बड़ी को पहले ही रोका जा सकता है अधेड़ उम्र की शुरुआत से ही कुछ सालाना जांचे करना आवश्यक होता है l